निक्षेप क्या होता हैं

निक्षेप शब्द को समझना काफी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इससे एग्जाम में हर -बार क्वेश्चन पूछ लिए जाते हैं जिसका नमूना कुछ इस प्रकार से दिए गए हैं –
निक्षेप की परिभाषा दीजिए । निक्षेपी एवं निक्षेपगृहिता के अधिकार एवं कर्तव्य का उल्लेख करें।
आज के इस नए आर्टिकल में मैं आपको इसी टॉपिक को बताने वाला हूं।

हेलो फ्रेंड्स मेरा नाम चंदन हैं एक और नए आर्टिकल में आपका स्वागत हैं।

निक्षेप क्या होता हैं?

यदि एक व्यक्ति द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति को इस अनुबंध से माल की सुपुर्दगी करना कि जब उद्देश्य पूरा हो जाएगा तब माल लौटा दिया जाएगा या सुपुर्दगी देने वाले व्यक्ति के आदेश के अनुसार बेच दिया जाएगा तो यह “निक्षेप” (Bailment) कहलाता है।

निक्षेप सुरक्षित रखने के लिए या प्रयोग करने के लिए हो सकता हैं। यह शुल्क सहित या शुल्क रहित भी हो सकता हैं।

भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 148 के अनुसार

एक व्यक्ति द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति को किसी निश्चित उद्देश्य हेतु कोई वस्तु सौंपी जाए और इस शर्त पर कि किसी निर्धारित उद्देश्य की पूर्ति के पश्चात वह वस्तु सौंपने वाले को वापस लौटा दी जायेगी या उसकी हिदायतों के अनुसार उसका अन्य प्रकार उपयोग कर लिया जाएगा।

अतः वस्तु की सुपुर्दगी वाला निक्षेपी (Bailor) कहा जाता हैं और वस्तु को सुपुर्दगी में लाने वाला निक्षेपगृहिता (Bailee ) कहलाता हैं।

उदाहरण के लिए,

क्रिकेट मैच या सिनेमा देखने जाने वाले दर्शकों का अपना स्कूटर या साइकिल किसी साइकिल स्टैंड वाले को सुपुर्द कर देना। यहां स्टैंड वाला निक्षेपगृहिता और साइकिल या स्कूटर वाला निक्षेपी ।

अनुबंध से आप क्या समझते हैं?

निक्षेपी के कर्तव्य एवं दायित्व

इसके कर्तव्य और जिम्मेदारी निम्नलिखित है जो नीचे के बिंदु में दिए गए हैं-

  1. असाधारण व्यय का भुगतान
  2. माल की सुपुर्दगी
  3. माल का दोष प्रकट कर देना
  4. निक्षेपगृहीता का पारिश्रमिक
  5. निक्षेपगृहीता को नुकसान

आइए इन सभी के बारे में एक-एक करके समझते हैं ।

असाधारण व्यय का भुगतान

जो व्यय (खर्च) साधारण नहीं होते हैं उनका भुगतान (Payment) करना निक्षेपी का प्रथम कर्तव्य व दायित्व होता हैं। असाधारण व्यय से तात्पर्य उन व्यय से होता है जिनका होना निश्चित नहीं होता हैं।

उदाहरण के लिए

मोहन अपना घोड़ा सोहन को पटना से बेतिया तक पहुंचाने के लिए देता है घोड़ा रास्ते में बीमार हो जाता है और सोहन को उसका इलाज कराना पड़ता है यहां इलाज पर किया गया खर्च असाधारण है जो कि मोहन के द्वारा सोहन को मिलना चाहिए।

माल की सुपुर्दगी

निक्षेपी जिस माल का निक्षेप करता है उसकी सुपुर्दगी निक्षेपगृहिता को देनी चाहिए। यह इसकी दूसरी प्राथमिकता हैं।

माल का दोष प्रकट कर देना

माल के सभी दोषों को प्रकट कर देना निक्षेपी का कर्तव्य होता हैं। यदि इन दोषों के कारण निक्षेपगृहीता को कोई भी नुकसान होता है तो निक्षेपी को उसका भर पाया करना होगा।

निक्षेपगृहीता का पारिश्रमिक

किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए यदि माल रखा जाता है तथा उसके लिए निक्षेपगृहीता स्वयं परिश्रम करता हैं तो परिश्रम के बदले में पारिश्रमिक देने के लिए निक्षेपी दायी होगा।

निक्षेपगृहीता को नुकसान

यदि निक्षेपित माल पर निक्षेपी का पूरा अधिकार नहीं था और वह अनाधिकृत रूप से उसे निक्षेपगृहीता के पास रख देता हैं या उसे किसी प्रकार का उपयोग करने का निर्देश देता है और यदि इन निर्देशों के अनुसार काम करने पर निक्षेपगृहीता को नुकसान हो जाता है तो उसकी पूर्ति करने का जिम्मेदारी निक्षेपी को होगा।

निक्षेपी के अधिकार

निक्षेपी को निम्नलिखित अधिकार प्राप्त होते हैं जो इस प्रकार से दिए गए हैं –

  • यदि निक्षेपित माल (Goods) से कोई लाभ हुआ है तो किसी विपरीत अनुबंध के अभाव में यह लाभ निक्षेपी ले सकता हैं।
  • निक्षेपित माल को यदि निक्षेपगृहिता ऐसे उपयोग में लेता है जिसके लिए वह अधिकृत नहीं है तो उससे उत्पन्न हानि (Loss) की पूर्ति पाने का हक निक्षेपी का है।
  • बिना पारिश्रमिक के दिए हुए निक्षेप पर माल को निक्षेपी कभी भी वापस ले सकते हैं।
  • यदि मिश्रण निक्षेपी की सहमति के अभाव में किया गया हैं और मिश्रण में से निक्षेपित माल को अलग करना संभव नहीं है तो ऐसी परिस्थिति में निक्षेपी को अधिकार है कि वह कुल माल की हानि के लिए क्षतिपूर्ति निक्षेपगृहिता से करा सकता हैं। धारा 156 के अनुसार।
  • यदि निक्षेपगृहिता निक्षेपी वस्तु की उचित देखभाल करने में लापरवाही बरते और इसमें निक्षेपी को नुकसान उठाना पड़े तो उसकी पूर्ति व निक्षेपगृहिता से कर सकता हैं।

निक्षेपगृहिता के अधिकार एवं दायित्व

Rights and Duties of a bailee इसके अधिकार एवं दायित्व निम्नलिखित हैं।

  • धारा 159 के अनुसार – अगर निक्षेपी अपने माल के दोषों को उजागर नहीं करता हैं तो निक्षेपगृहिता इससे होने वाली हानि की पूर्ति निक्षेपी से करा सकता हैं।
  • यदि निक्षेपी निःशुल्क (Free) हैं तो निक्षेपगृहिता उस संबंध में किए गए आवश्यक व्ययों (expenses) की क्षतिपूर्ति भी लेने का हकदार है।
  • धारा 180 के अनुसार – जब तीसरा व्यक्ति निक्षेपगृहिता को निक्षेपित माल पर नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है तो वह उसके विरुद्ध दावा करके हानि पूर्ति पाने का अधिकारी है।
  • धारा 165 – अनेक व्यक्तियों द्वारा संयुक्त रुप से माल निक्षेपी किए जाने की स्थिति में निक्षेपगृहिता को यह अधिकार है कि वह बिना अन्य सह – निक्षेपियों से अनुमति लिए इनमें से किसी एक व्यक्ति का माल लौटा सकता हैं।