मांग की लोच से | मांग की लोच को प्रभावित करने वाले तत्व

मांग यानी की डिमांड कहते हैं ना जिस वस्तु की जरूरत अधिक हो और बाजार में वह वस्तु कम मात्रा में मौजूद हो तो उस वस्तु का मांग अधिक होगा। इसमें पोस्ट में आज आप मांग की लोच से आप क्या समझते हैं?, मांग की लोच को प्रभावित करने वाले तत्व, इस को ज्ञात करने का सूत्र एवं अंत में FAQs भी देखेंगे।

मांग की लोच से आप क्या समझते हैं?

मांग की लोच किसी दी हुई मांग की वक्र रेखा पर मूल्य के एक साथ सापेक्षिक परिवर्तन के प्रतिपादन में क्रय की मात्रा के सापेक्षिक परिवर्तन की माप है।

मांग की लोच के संबंध में कई विद्वानों ने अपना-अपना मत दिया है जो नीचे के पंक्ति में दिए गए हैं –

बेनहम के मत के अनुसार – “मांग की लोच के इस विचार का संबंध मूल्य में होने वाले छोटे से परिवर्तन से मांग की मात्रा पर पड़ने वाले प्रभाव से हैं।”

एस. के. रुद्र के शब्दों में – “मूल्य में न्यूनतम परिवर्तन होने पर मांग के परिवर्तन हो जाने की क्षमता को मांग की लोच कहते हैं।”

डॉक्टर केर्नक्रास – “वस्तु की मांग की लोच उस गति को प्रदर्शित करती है जिस पर मांगी हुई वस्तु की मात्रा मूल्य के आधार पर बदलती हैं।” (परंतु यह परिभाषा ठीक प्रतीत नहीं होती है।)

बोल्डिंग के शब्द में – “मांग की लोच मूल्य में परिवर्तनों के प्रति मांग की मात्रा के प्रतिपादन को मापती हैं।”

उपरोक्त परिभाषा से स्पष्ट होता है कि

मूल्य में परिवर्तन के फलस्वरुप मांगों में जो परिवर्तन होता है उसे ही मांग की लोच कहते हैं।

मांग की लोच को प्रभावित करने वाले तत्व

हर एक वस्तु की मांग की लोच कुछ कारणों, परिस्थितियों अथवा वस्तु विशेष के गुणों पर निर्भर करती हैं। कुछ वस्तुओं की मांग अधिक लोचदार होती है जबकि कुछ वस्तुओं की कम। इसी प्रकार बहुत सी वस्तुओं की मांग बेलोचदारर भी हुआ करती है। मांग की लोच निम्नलिखित बातों से प्रभावित होती है –

  1. वस्तु का मूल्य
  2. वस्तु विशेष का गुण
  3. समाज में संपति का वितरण
  4. उपभोक्ता की आय
  5. वस्तु के भविष्य उपयोग की संभावना

#1 वस्तु का मूल्य –

वस्तु के मूल्य का भी मांग की लोच पर काफी अधिक प्रभाव पड़ता है। ऊंचे मूल्य पर वस्तु की मांग लोच अधिक होती है लेकिन नीचे मूल्य पर मांग की लोच कम हो जाती है और यदि मूल्य इतना कम हो जाए कि संतुष्टि की सीमा तक आ जाए तो मांग की लोच समाप्त हो जाती है।

#2 वस्तु विशेष का गुण –

किसी वस्तु की मांग प्रायः उस वस्तु विशेष के गुणों पर निर्भर करती है। प्रायः आवश्यक वस्तुओं की मांग बेलोचदार हुआ करती है क्योंकि इन वस्तुओं का उपभोग ना करने से व्यक्ति का जीवन कष्टमय या पीड़ामय बन जाता है।

यदि आवश्यक वस्तुओं के मूल्य में थोड़ी सी भी कमी हो जाए तो इन वस्तुओं की मांग में कोई वृद्धि नहीं होगी। आरामदायक वस्तु की मांग लोचदार होती है क्योंकि आरामदायक वस्तुएं मनुष्य की कार्य क्षमता में वृद्धि करती है। विलासिता वाली वस्तुओं की मांग अत्यधिक लोचदार होती हैं।

#3 समाज में संपति का वितरण –

यदि समाज में संपत्ति का वितरण समान होता है तो वस्तु की मांग लोचदार होती है क्योंकि मूल्य में थोड़े परिवर्तन से समाज के सभी वर्गों पर प्रभाव पड़ता है। परंतु जब समाज में धन का वितरण असमान होता है तो वस्तु की मांग बेलोचदार होती है क्योंकि समाज में 2 वर्ग उत्पन्न हो जाते हैं अमीर और गरीब। इसलिए मूल्य में परिवर्तन का प्रभाव लोगों पर भी पड़ता है।

#4 उपभोक्ता की आय –

मांग की लोच उपभोक्ताओं की आय पर भी निर्भर करती है। यदि उपभोक्ता की आय अधिक होगी तो मांग की लोच कम होगी। इसके विपरीत यदि उपभोक्ता की आय कम होती है तो मांग की लोच अधिक होती है।

#5 वस्तु के भविष्य उपयोग की संभावना –

यदि कोई वस्तु ऐसी है कि उसका उपभोग भविष्य के लिए टाला जा सकता है तब उस वस्तु की मांग लोचदार होगी लेकिन यदि उपभोग को टालना संभव नहीं है तो मांग की लोच नहीं होगी।

मांग की लोच को ज्ञात करने का सूत्र क्या हैं?

मांग की लोच को निम्नलिखित तरीकों से ज्ञात किया जा सकता है –
प्रतिशत प्रणाली के द्वारा मांग की लोच को ज्ञात करने का सूत्र

मांग की लोच बराबर = मांग में परिवर्तन का प्रतिशत / मूल्य में परिवर्तन का प्रतिशत

इस सूत्र के द्वारा यह पता लगाया जाता है की मांग की लोच इकाई के बराबर है या अधिक है या इकाई से कम है।

FAQs

प्रश्न संख्या 01 – मांग की लोच को कितने तरीकों से ज्ञात किया जा सकता है?

उत्तर – मांग की लोच को निम्नलिखित तरीके से ज्ञात किया जा सकता है a. चाप प्रणाली b. बिंदु प्रणाली c. प्रतिशत प्रणाली d. कुल व्यय प्रणाली आदि।

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