प्रेषण खाता

आज का समय बहुत तेजी से बदल रहा है ऐसे बाजार में भी काफी परिवर्तन हुए हैं। एक व्यापारी प्रेषण खाता (Consignment Account) का इस्तेमाल करता हैं। ऐसे में आपको प्रेषण,प्रेषण खाता, विशेषताएं तथा इससे संबंधित अन्य बातें मालूम होना चाहिए। आज के इस पोस्ट में मैं आपको प्रेषण का अर्थ क्या है, प्रेषण खाता क्या है Consignment Account In Hindi , विशेषता तथा प्रेषण और बिक्री में अंतर क्या होता है उसे बताऊंगा।

प्रेषण का अर्थ क्या हैं | Consignment Meaning In Hindi

आज हम सब जिस युग में रह रहे हैं, वह युग में वस्तुओं और सेवाओं का बाजार काफी अधिक विस्तृत होता जा रहा है।ऐसी स्थिति में एक निर्यातकर्त्ता अथवा उत्पादक के लिए दूर-दराज के अपने उपभोक्ताओं के साथ सीधा संपर्क स्थापित करना कठिन है। निर्यातकर्त्ता, निर्माता या थोक विक्रेता, एजेंट के माध्यम से वस्तु या सेवाएं बेचना अधिक आसान व लाभप्रद मानते हैं। निर्यातकर्त्ता और थोक विक्रेता विभिन्न प्रकार के एजेंटों की नियुक्ति करते हैं जो उनके बदले में और उन्हीं की जोखिम पर उनके माल को बेचते हैं। इस प्रकार से,
जब निर्यातकर्त्ता या निर्माता या यूं कहें तो माल के स्वामी द्वारा एजेंटों के पास बिक्री के लिए माल भेजना ही प्रेषण या चालान (Consignment) कहलाता हैं।

उदाहरण- 1
X का कलम का कारखाना हैं।आस-पास के सभी इलाकों में X का ही कलम अधिक बिक्री होता है लेकिन X के कस्टमर जो दूर-दराज है वह उनसे डायरेक्ट संपर्क नहीं कर पा रहा है। इसके लिए वह एजेंटों जैसे कि थोक विक्रेता, सप्लायर, डिस्ट्रीब्यूटर आदि का सहारा लेता है और बदले में उन्हें कमीशन देता है यही प्रक्रिया ‘प्रेषण’ कहलाता हैं।

उदाहरण- 2
आपके पास Jio, Airtel ,Bsnl या फिर किसी भी कंपनी का सिम जरूर होगा। आपके एरिया में जो व्यक्ति सिम चालू करते हैं या तो वह रिटेलर होंगे या डिस्ट्रीब्यूटर। वह उस कंपनी का मालिक नहीं होते हैं बल्कि कंपनी उसे कमीशन पर अपने माल को बेचने के लिए रखती है यही प्रक्रिया ‘प्रेषण’ Consignment हैं।

ऑक्सफोर्ड लेखांकन के अनुसार – एक प्रेषक द्वारा प्रेषित को निर्धारित मूल्य पर अथवा बाजार मूल्य पर प्रेषण पर भेजे गए माल को प्रेषण कहा जाता हैं।

प्रेषण से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बातें-

1. प्रेषक कौन होता हैं?
उत्तर- माल और सेवा के विक्रय हेतु ऐजेंटो के पास जो व्यक्ति या व्यापारी भेजता हैं उसे प्रेषक Consignor या माल धनी कहा जाता हैं। प्रेषक की स्थिति प्रधान की होती है। प्रेषक को चालानकर्ता के नाम से भी जाना जाता है।

2. प्रेषणी या प्रेषिती कौन होते हैं?
उत्तर – जिस व्यक्ति या संगठन के पास माल बिक्री के लिए भेजा जाता है उसे प्रेषणी या प्रेषिती कहा जाता हैं। प्रेषणी को माल पाने वाला भी कहा जाता हैं। प्रेषणी की स्थिति एजेंट की होती हैं। इसे एक अन्य नाम ‘आढ़तिया’ से भी जानते है।

3. प्रेषण पर भेजे गए माल, माल का स्वामित्व प्रेषक के पास रहता हैं।

4. बिक्री पत्र या विक्रय लेखा क्या होता हैं?
उत्तर – यह एक ऐसा पत्र होता है जिसमें हिसाब- किताब को रखा जाता हैं। इसमें प्रेषणी द्वारा बेचे गए माल का विवरण, प्रेषणी के द्वारा किए गए व्ययों, Advance Payment और बाकी देय राशि आदि का उल्लेख होता हैं।

प्रेषक की विशेषताएं|Features Of Consignment in hindi

1. प्रेषण पर भेजे गए वस्तु या सेवा पर होने वाले लाभ तथा नुकसान प्रेषक के होते हैं।
2. माल के प्रेषण में माल की Risk प्रेषक के साथ रहता हैं।
3. Consignment की स्थिति में प्रेषणी को सिर्फ माल का अधिकार हस्तांतरित होता है ना कि माल का स्वामित्व का
4. इसने वस्तु एवं सेवा को एजेंटों के माध्यम से बेचना अधिक लाभप्रद व सुविधा होती हैं।
5. प्रेषक और प्रेषती के बीच प्रधान का संबंध होता हैं।
6. एजेंटों को माल बेचने के बदले में उचित कमीशन दिया जाता हैं।

चालान खाता क्या हैं?

चालान खाता से आशय कमीशन के आधार पर माल की बिक्री के उद्देश्य से प्रेषक द्वारा एजेंटों को माल भेजने से हैं। इसे प्रेषण Consignment के नाम से जानते हैं।

विक्रय तथा प्रेषण में क्या अंतर हैं

जब किसी वस्तु या सेवा को बेच दिया जाता है और उसके बदले पैसे ले लिए जाते हैं तो वस्तु या सेवा का स्वामित्व माल खरीदने वाला व्यक्ति के पास आ जाता हैं।विक्रय तथा प्रेषण में निम्नलिखित अंतर हैं-

 

अंतर का आधार

विक्रय (Sales)

प्रेषण(Conginment)

परिभाषा

विक्रय से आशय वस्तु को बेचने से है जिसके बाद माल का स्वामित्व क्रेता के पास आ जाता हैं।

प्रेषण से आशय एजेंटों के माध्यम से माल बेचने से है जिसमें माल का स्वामित्व प्रेषक के पास ही रहता हैं।

बिक्री पत्र

माल खरीदने वाले व्यक्ति के द्वारा विक्रेता को किसी भी प्रकार का विक्रय पत्र भेजने की जरूरत नहीं होती है।

इसमें एजेंटों द्वारा प्रेषक को एक निश्चित समय के बाद बिक्री पत्र भेजना होता हैं।

पेमेंट

बिक्री में समझौते के अनुसार पैसे का पेमेंट किया जाता है।

इसमें माल जैसे ही बिकता है तब पेमेंट किया जाता है नहीं तो इसके पहले नहीं किया जाता हैं।

जोखिम

इसमें माल खरीदने वालों पर जोखिम होता है।

इसमें वस्तुओं का मालिक प्रेषक होता है वस्तुओं की जोखिम प्रेषक पर होती हैं।

समबन्ध

इसमें जैसे ही माल की सुपुर्दगी तथा पेमेंट हो जाता है तो दोनों पक्षों के बीच का संबंध समाप्त हो जाता है।

इसमें यह प्रक्रिया तब तक चलता रहता है जब तक कि एजेंट संबंध तोड़ नहीं देता या फिर माल का मालिक माल भेजना बंद नहीं कर देता।