नियुक्तिकरण किसे कहते हैं |Staffing In Hindi

प्रबंध के सभी कार्य एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। एक के बिना किसी एक का महत्व नहीं है। नियुक्तिकरण प्रबंध का अहम एवं तीसरा अंग है। ऐसा कहा जाता है कि प्रबंध के शुरुआत के दो कार्य नियोजन एवं संगठन में गलती रह जाए तो इतनी हानि नहीं होती है जितनी कि गलत व्यक्ति को नियुक्त कर लेने से। नियुक्तिकरण किसे कहते हैं इसके बारे में पूरा डिटेल इस Article में दिया गया है।

 

नियुक्तिकरण किसे कहते हैं?

नियुक्ति करण से आशय संगठन में स्थापित विभिन्न पदों पर पद के महत्व के अनुसार योग्य व्यक्तियों को नियुक्त (Selection) करने से हैं इस प्रकार से पद और व्यक्ति में सामंजस्य स्थापित करने की सभी क्रियाएं नियुक्तिकरण (Staffing) के अंतर्गत आते है।

 

नियुक्तिकरण की विशेषताएं

इसकी विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

  • यह प्रबंध का महत्वपूर्ण कार्य एवं उत्तरदायित्व है जो संस्था के क्रियाकलापों के संचालन हेतु पर्याप्त संख्या में प्रबंधकीय कर्मचारियों एवं अन्य कर्मचारियों को उपलब्ध करने, उनका विकास करने और उन्हें संस्था में बनाए रखने से संबंध रखते हैं।
  • इसे प्रबंध प्रणाली की उप-प्रणाली भी कहा जाता है। कारण यह है कि यह संगठन संरचना नियोजन से जुड़ा हुआ है और संगठन संरचना नियोजन संस्था की योजनाओं पर निर्भर करती हैं।
  • नियुक्तिकरण पर वातावरण का आंतरिक एवं बाहरी दोनों तरह के प्रभाव पड़ते हैं।
  • यह एक ऐसा कार्य हैं जो हमेशा चलते रहते हैं।
  • इसका संबंध मनुष्य से होता है ना कि वस्तुओं से।
  • वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं को पूर्ति करता हैं।
  • यह प्रबंध के सभी स्तरों पर आवश्यक होता है।

 

नियुक्ति करण के महत्व के किन्हीं तीन बिंदुओं का वर्णन कीजिए​

योग्य, कुशल कर्मचारी की नियुक्ति करण किसी भी संगठन के सबसे मूल्यवान पूंजी हैं। किसी व्यवसाय उपक्रम के पास उत्पादन की सामग्री कितने अच्छे क्वालिटी की क्यों ना हो, उत्पादन की प्रक्रिया कितनी भी अच्छी क्यों ना हो उसके पास योग्य कर्मचारियों का अभाव होगा तो सभी संसाधन बेकार है।

अतः इसके लिए संस्था को योग्य, कुशाल,ईमानदार, समर्पित एवं अनुभवी कर्मचारियों को नियुक्त करने की आवश्यकता होती है नियुक्ति करण की आवश्यकता एवं महत्व कुछ इस प्रकार से हैं –

  1. संसाधनों का कुशलता एवं अधिकतम प्रयोग करने के लिए – एक कंपनी का व्यक्तियों को नियुक्त करने का मेन मकसद उसके द्वारा जितने भी समान (Goods) हैं उन सभी का सही एवं अच्छे से इस्तेमाल किया जाए। अब निर्भर इस बात पर करता है कि संस्था या फिर कंपनी के द्वारा व्यक्ति को किस माध्यम से भर्ती किया गया है।
  2. संस्था में उत्पादन तथा उत्पादकता में वृद्धि करने के लिए – प्रत्येक कंपनी का उद्देश्य होता है अधिक से अधिक लाभ कमाना। अधिक लाभ हो इसके लिए अधिक व्यक्तियों की भी आवश्यकता होगी यह इसका महत्व है।
  3. व्यवसायिक उपक्रम की समस्याओं का समाधान करने हेतु – बिजनेस में Risk तो होता ही है और साथ ही कई तरह की समस्याएं भी आती है व्यक्तियों को नियुक्त करने से समस्याओं को दूर किया जा सकता है।

 

नियुक्ति करण की प्रक्रिया या स्टाफिंग की प्रक्रिया

नियुक्तिकरण की प्रक्रिया में निम्नलिखित 6 कदम उठाया जाता हैं-

  1. मानव शक्ति की आवश्यकताओं का गणना (आकलन) – नियुक्ति करण के प्रथम चरण में कर्मचारियों की आवश्यकताओं का अनुमान लगाया जाता है।
  2. भर्ती – इसके अंतर्गत भावी कर्मचारियों के विभिन्न स्रोतों की खोज करना तथा उन्हें संस्था में प्रार्थना पत्र देने हेतु प्रोत्साहित करना शामिल किया जाता है।
  3. चयन – इसमें अनेक आवेदकों में से योग्य व्यक्ति का चुनाव करना शामिल किया जाता है। इसमें यह ध्यान रखा जाता है कि प्रार्थी (आवेदक करने वाला व्यक्ति) की कुशलता एवं कार्य की प्रकृति में सामानता हो।
  4. कार्य पर लगाना – इसके अंतर्गत चुने गए कर्मचारियों को कार्य पर लगाया जाता है और उन्हें उनकी जिम्मेदारी बताई जाती है।
  5. प्रशिक्षण एवं विकास – स्टाफिंग की प्रक्रिया में इसका अहम Role हैं। इसके अंतर्गत कर्मचारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है तथा विकास के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते हैं ताकि उनकी कुशलता में वृद्धि की जा सके और अधिक से अधिक कार्य में भी वृद्धि हो।
  6. निष्पादन मूल्यांकन – इसके अंतर्गत कर्मचारियों में कार्य का मूल्यांकन निर्धारित प्रमाण के संदर्भ में किया जाता है।

 

Conclusion :

नमस्ते पाठक! आशा करता हूं कि नियुक्ति करण किसे कहते हैं इससे संबंधित सभी जानकारी आपको मिल गई होगी। इस Article में और क्या ऐड होना चाहिए Comment में बताएं।

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