सत्यापन क्या हैं | Verification In Hindi

क्या हम जो कुछ पढ़ते- लिखते हैं वह सत्य होता हैं। अगर आपका जवाब है नहीं तो सत्यापन की जरूरत हैं। आखिर सत्यापन का मतलब क्या है, उद्देश्य, महत्व, सिद्धांत आदि आज के इस पोस्ट में इन सभी बातों को जानेंगे।

सत्यापन को परिभाषित करें

सत्य को सिद्ध करना सत्यापन कहलाता हैं। सत्यापन शब्द का प्रयोग अलग-अलग जगह पर किया जाता है लेकिन इसका मूल अर्थ जो सत्य है उसे प्रमाण देकर सही साबित करना होता हैं। कुछ आसान उदाहरण के माध्यम से इसे समझते हैं –

उदाहरण संख्या -01

जब आप दसवीं क्लास के विद्यार्थी थे या फिर होंगे तो आपको प्रेमय सिद्ध करने के लिए मिला होगा या फिर मिलेगा इसमें प्रेमय सही लिखा होता है बस कुछ फार्मूला लगाकर प्रमाण देते हुए सिद्ध करना होता हैं।एक अन्य प्रश्न ए प्लस बी का होल स्क्वायर बराबर ए स्क्वायर प्लस बी स्क्वायर प्लस टू ए बी सिद्ध करें।

उदाहरण संख्या -02

आर्थिक चिट्ठा में दर्शाई गई संपत्तियों तथा दायित्व का मूल्य सही है या नहीं उसके लिए अंकेक्षक द्वारा सत्यापन करना।

सत्यापन के अन्य परिभाषाएं

पैगलर के शब्दों में संपत्तियों के सत्यापन का अर्थ संपत्तियों के मूल्य, स्वामित्व, विद्यमान तथा अधिग्रहण एवं उन पर किसी प्रकार के प्रभार (Charge) होने के बारे में जांच करना हैं।

सत्यापन के उद्देश्य

  1. सत्यापन का मुख्य उद्देश्य अंकेक्षक को इस बात से संतुष्ट करना है कि बैलेंस शीट तैयार करते समय चिट्ठा में जो संपत्ति दिखाया गया है वह संस्था के पास मौजूद हो।
  2. संस्था के बैलेंस शीट में दिखाया गया संपत्तियों की राशि सही एवं शुद्ध होना चाहिए।
  3. संपत्तियों का सही मूल्यांकन सत्यापन का तीसरा उद्देश्य हैं।
  4. संस्था के चिट्ठा में जो संपत्तियां दिखाई गई हो उस पर संस्था का मालिकाना होना चाहिए।
  5. चिट्टा में संस्था की संपत्ति और दायित्व गणितीय रूप से शुद्ध है या फिर नहीं उसकी जानकारी उपलब्ध कराना सत्यापन का एक प्रमुख उद्देश्य है।
  6. छल-कपट पर नियंत्रण हो होना।

 

सत्यापन का क्या महत्व हैं?

सत्यापन का महत्व निम्नलिखित हैं जो नीचे के लाइन में इस तरह से दिए गए हैं –

  • यह लेखा पुस्तकों एवं विभिन्न विवरणों का प्रमाणन एवं लाभ-हानि विवरण तथा बैलेंस शीट तैयार करने की बाद की प्रक्रिया हैं।
  • संपत्ति एवं दायित्व का मूल्यांकन करने के लिए सत्यापन को ही मूल आधार माना जाता हैं।
  • सत्यापन से यह पता चलता है कि कौन से संपत्ति पर संस्था का अधिकार है एवं किस पर नहीं।
  • प्रमाणन में हुई कमियों को सत्यापन के जरिए दूर किया जा सकता है।
  • किसी संस्था के पास कितने ऋण सुरक्षित हैं और कितने नहीं। यह सब सत्यापन से ही मालूम हो पाता हैं।
  • संस्था के संपत्तियों का गलत उपयोग हो रहा हो इसकी जानकारी सत्यापन से आसानी से हो जाती हैं।
  • संस्था का सत्यापन होने से इन्वेस्टर के प्रति विश्वास बनता है और वह कंपनी में पैसा निवेश करने के लिए तैयार हो जाते हैं।

 

सत्यापन का सिद्धांत

संपत्ति एवं दायित्वों का सत्यापन करते समय कुछ बातों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है जिसे सत्यापन का सिद्धांत कहा जाता है। इसके निम्नलिखित सिद्धांत होते हैं –

  1. भौतिक जांच – संस्था के पास कुछ संपत्तियां ऐसी होती है जिनकी संख्या ज्ञात होना आवश्यक होता है। भौतिक जांच के अंतर्गत संपत्ति की केवल मौजूदगी को ही ध्यान में नहीं रखा जाता है बल्कि मूल्य की भी जांच की जाती है।
  2. दोबारा जांच का सिद्धांत – यह सत्यापन का महत्वपूर्ण सिद्धांत माना जाता है। दोबारा जांच के सिद्धांत से आश्य यह है कि पहले जो जांच किए गए हैं उनको फिर से चेक करते हुए मिलान करना।
  3. अंतर/तुलना करना – इसके अंतर्गत उन सभी क्रियाओं को शामिल किया जाता है जिनसे आर्थिक चिट्ठा में दर्शाई गई संपत्ति एवं दायित्वों का अंतर प्रारंभिक लेखा पुस्तकों में दी गई मूल्य से किया जाता है। इन दोनों मूल्य के बीच अंतर निकाला जाता है और गलती होने की स्थिति में उसे दूर किया जाता है।
  4. संपुष्टि – इसका अर्थ तुलन पत्र में विद्यमान प्रमाणीकरण से है। संपुष्टि इससे यह पता चलता है कि संबंधित संपत्ति का स्वामित्व यानी कि मालिकाना हक तथा आधिपत्य संस्था के हाथों में है भी या फिर नहीं।
  5. प्रमापों को की जांच करना – संपत्ति एवं दायित्व से संबंधित उन सभी प्रमाणों की जांच की जानी चाहिए जिससे यह मालूम किया जा सके कि संपत्ति और दायित्व के ओरिजिनल प्रमाण पत्र सही है या फिर गलत।

Conclusion :

सत्यापन क्या है यह शब्द जितना आसान लगता है पर इतना है नहीं। इस पोस्ट में इसे सरल शब्दों में परिभाषित किया गया है जो आपको पसंद आया होगा।

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